Saturday, June 16, 2012

सभ्यता के संघर्ष में हिंदुत्व की पूर्व पीठिका :-


सभ्यता के संघर्ष के सिद्धांत की बड़े पैमाना आलोच्य विषय रहा हैं ! कुछ लोग इसे मिथक या भ्रामक प्रोपेगंडा कहते हैं तथा कुछ इसे
तृतीय विश्व युद्ध की पूर्वपीठिका मानते हैं ! आतंकवाद के खिलाफ चल रहे  वैश्विक युद्ध के परिदृश्य में ये बात साफ़ उभर कर सामने आई हैं कि यह विषय केवल कोरी कल्पना नहीं हैं ! अलकायदा से जुड़े लोगों से मिली काव्यात्मक लेखन सामग्री ने साबित किया हैं कि वे  अमेरिका , इस्राएल व् भारत को संयुक्त रूप से इस्लाम का दुश्मन समझकर उनके खिलाफ इस्लामिक जेहाद चला रहे हैं !
इन देशो को ये गैर मुस्लिम , ईसाई -यहूदी एवं हिंदू देश के रूप में चिन्हित करते हैं ! ऐतिहासिक रूप से ईसाई व मुसलमानों में क्रूसेड एवं जेहाद का लंबा दौर रहा हैं ! कुरान में मुहम्मद साहब ने यहूदियों को सदा-सदा के लिये शाश्वत शत्रु के रूप में अभिशापित कर दिया हैं ! हिन्दुओ को मुस्लिम लोग एक ऐसे कौम मानते हैं जिसे वो विजित करने पर भी पूरी तरह खत्म नहीं कर पाये !
पूर्वाग्रह एवं परम्परागत- शाश्वत शत्रुता की इस खूनी लकीर को हमने नही उन्होंने परिभाषित किया हैं ! हम सबको तो ये सिर पर पड़ी आफत झेलनी पड रही हैं ! ईसाई भी सेमेटिक मूल के कारण दुनिया को दो भागो में विभाजित करते हैं तथा उनका एजेंडा भी एक दिव्य मिशन लेकर चलता हैं जो सारी दुनिया को ईसाई बनाना चाहता हैं ! यहूदी जो सेमेटिक दर्शन के मूल में हैं आजकल अपने रणनीतिक सहयोगी तलाश रहे हैं ! उन्हें हिन्दुओ में इसकी सम्भावना दिखती हैं ! भारतीय दर्शन वसुधैव कुटुंबकम् जैसे अवधारणाओ के कारण इस दुनिया के सभी प्राणियों के लिये सर्वोत्तम हैं ! अत: अगर इस्लाम अपनी उग्रता और बर्बरता के कारण मुख्य खल चरित्र हैं
और ईसाई धूसर नकारात्मक चरित्र व यहूदी सहयोगी बहुआयामी चरित्र अभिनेता है तो इस वैश्विक चलचित्र का नायक केवल और केवल हिंदू ही हैं ! जिसे अंत में इन सब पर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुये विजय श्री दर्ज करनी ही होगी !
                                                                                        ( क्रमश: )
                                                                              सुप्रसिद्ध समतामूलक विचारक
                                                                                     श्री विद्याभूषण       

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