इसके बाद भी भ्रश्टचार के अनेक मामले सामने आए जिनमें से कुछ में कार्रवाई भी हुई कुछ में नहीं भी हुई। जेपीसी का भी गठन कई बार हुआ। कंग्रेस सरकार अपने इतिहास को भूली तो नहीं होगी । उस समय मीडिया इतना ताकतवर भी नहीं था। अब जब कि मीडिया इतनी ताकतवर है कि मंत्रालय किसको मिलना चाहिए ये फैसला भी कुछ मीडिया दलाल करते है। खैर यह एक अलग बात है। भाजपा कैग की रपट के बाद जेपीसी की मांग कर रही हैॅ। ये भी कोई तुक की बात नहीं है क्योकि अभी तक कैग की रपट पर सीधी कार्रवाई होती आई है जो अब भी होनी चाहिए। जिससें आम जनता में यह विष्वास पनप सके कि सरकार की नीयत में कोई खोट नहीं है क्योकि सरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की छवि को कब तक दागदार करती रहेगी । निष्चित ही प्रधानमंत्री जी की छवि ईमानदार व्यक्ति की है पर ऐसी ईमानदारी किस काम की जिसकी ओट में राजा जी,सुरेष कलमाडी, अषोक चव्हाण जैसे लोग जनता के साथ धोखेबाजी कर रहे हो। इस सब का श्रेय किसके माथे वर होगा। आम जनता के लिए प्याज भी मयस्सर नहीं है और उदयोगपति स्पैक्टम को भी दलालों के साथ मिलकर आराम से डकार ले रहैं हो। भाजपा मुख्य विपक्षी दल है। उसका काम है साकार को ये याद दिलाना कि आप जो कुछ भी फैसले ले रहै है उसमें जो कुछ भी जनता के हित में न हो सरकार के ऐसे फैसलों को लेने में आगाह करना कि क्या ये फैसले देषहित में है़ अगर नहीं है तो उनपर सोचा जाए। जो एक तरह से देखा जाए तो कर भी रही है। किंतू संसद में काम ही न हो इस षर्त पर कतई नहीं। काग्रेस की भी कार्यषैली की भी आलोचना की जानी चाहिए। काॅमनवेल्थ के मामले में एक मजे की बात जब भ्रश्टाचार को लेकर भाजपा ने षोर गुल किया तो एक भाजपाई दलाल को मीडिया के सामने खडा कर दिया । और बडे षान से कहा कि भ्रश्ट कौन। जबकि होना तो ये चाहिए था कि बगैर राजनैतिक द्वैष के सभी घौटालेबाजों को सामने लाने का साहस सरकार को करना चाहिए था। सरकार को ये कभी नहीं समझना चाहिए कि जनता के पास दिमाग जैसी चीज का अभाव हैै और अगर वह ऐसा समझती है तो बिहार जैसे परिणामों के तैयार रहे।
Thursday, February 7, 2013
भ्रष्ट राजनेता बदनाम सरकारें
बात साठ के दषक के अंत की है जब तत्कालीन राश्ट्रपति डा0 राजेंद्र प्रसाद ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिखा था जिसमें उस समय के भ्रश्टाचार पर चिंता जताई गई थी। जिसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। आज़ादी के तुरंत बाद बहुत चर्चित जीप कांड का घोटाला सामने आया था तो कैग की रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि कैग को अति विष्वसनीय बताते हुए तुरंत कार्रवाई करते हुए लिप्त कश्ण मेनन का इस्तीफा मांगा व कार्रवाई की थी।
इसके बाद भी भ्रश्टचार के अनेक मामले सामने आए जिनमें से कुछ में कार्रवाई भी हुई कुछ में नहीं भी हुई। जेपीसी का भी गठन कई बार हुआ। कंग्रेस सरकार अपने इतिहास को भूली तो नहीं होगी । उस समय मीडिया इतना ताकतवर भी नहीं था। अब जब कि मीडिया इतनी ताकतवर है कि मंत्रालय किसको मिलना चाहिए ये फैसला भी कुछ मीडिया दलाल करते है। खैर यह एक अलग बात है। भाजपा कैग की रपट के बाद जेपीसी की मांग कर रही हैॅ। ये भी कोई तुक की बात नहीं है क्योकि अभी तक कैग की रपट पर सीधी कार्रवाई होती आई है जो अब भी होनी चाहिए। जिससें आम जनता में यह विष्वास पनप सके कि सरकार की नीयत में कोई खोट नहीं है क्योकि सरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की छवि को कब तक दागदार करती रहेगी । निष्चित ही प्रधानमंत्री जी की छवि ईमानदार व्यक्ति की है पर ऐसी ईमानदारी किस काम की जिसकी ओट में राजा जी,सुरेष कलमाडी, अषोक चव्हाण जैसे लोग जनता के साथ धोखेबाजी कर रहे हो। इस सब का श्रेय किसके माथे वर होगा। आम जनता के लिए प्याज भी मयस्सर नहीं है और उदयोगपति स्पैक्टम को भी दलालों के साथ मिलकर आराम से डकार ले रहैं हो। भाजपा मुख्य विपक्षी दल है। उसका काम है साकार को ये याद दिलाना कि आप जो कुछ भी फैसले ले रहै है उसमें जो कुछ भी जनता के हित में न हो सरकार के ऐसे फैसलों को लेने में आगाह करना कि क्या ये फैसले देषहित में है़ अगर नहीं है तो उनपर सोचा जाए। जो एक तरह से देखा जाए तो कर भी रही है। किंतू संसद में काम ही न हो इस षर्त पर कतई नहीं। काग्रेस की भी कार्यषैली की भी आलोचना की जानी चाहिए। काॅमनवेल्थ के मामले में एक मजे की बात जब भ्रश्टाचार को लेकर भाजपा ने षोर गुल किया तो एक भाजपाई दलाल को मीडिया के सामने खडा कर दिया । और बडे षान से कहा कि भ्रश्ट कौन। जबकि होना तो ये चाहिए था कि बगैर राजनैतिक द्वैष के सभी घौटालेबाजों को सामने लाने का साहस सरकार को करना चाहिए था। सरकार को ये कभी नहीं समझना चाहिए कि जनता के पास दिमाग जैसी चीज का अभाव हैै और अगर वह ऐसा समझती है तो बिहार जैसे परिणामों के तैयार रहे।
इसके बाद भी भ्रश्टचार के अनेक मामले सामने आए जिनमें से कुछ में कार्रवाई भी हुई कुछ में नहीं भी हुई। जेपीसी का भी गठन कई बार हुआ। कंग्रेस सरकार अपने इतिहास को भूली तो नहीं होगी । उस समय मीडिया इतना ताकतवर भी नहीं था। अब जब कि मीडिया इतनी ताकतवर है कि मंत्रालय किसको मिलना चाहिए ये फैसला भी कुछ मीडिया दलाल करते है। खैर यह एक अलग बात है। भाजपा कैग की रपट के बाद जेपीसी की मांग कर रही हैॅ। ये भी कोई तुक की बात नहीं है क्योकि अभी तक कैग की रपट पर सीधी कार्रवाई होती आई है जो अब भी होनी चाहिए। जिससें आम जनता में यह विष्वास पनप सके कि सरकार की नीयत में कोई खोट नहीं है क्योकि सरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की छवि को कब तक दागदार करती रहेगी । निष्चित ही प्रधानमंत्री जी की छवि ईमानदार व्यक्ति की है पर ऐसी ईमानदारी किस काम की जिसकी ओट में राजा जी,सुरेष कलमाडी, अषोक चव्हाण जैसे लोग जनता के साथ धोखेबाजी कर रहे हो। इस सब का श्रेय किसके माथे वर होगा। आम जनता के लिए प्याज भी मयस्सर नहीं है और उदयोगपति स्पैक्टम को भी दलालों के साथ मिलकर आराम से डकार ले रहैं हो। भाजपा मुख्य विपक्षी दल है। उसका काम है साकार को ये याद दिलाना कि आप जो कुछ भी फैसले ले रहै है उसमें जो कुछ भी जनता के हित में न हो सरकार के ऐसे फैसलों को लेने में आगाह करना कि क्या ये फैसले देषहित में है़ अगर नहीं है तो उनपर सोचा जाए। जो एक तरह से देखा जाए तो कर भी रही है। किंतू संसद में काम ही न हो इस षर्त पर कतई नहीं। काग्रेस की भी कार्यषैली की भी आलोचना की जानी चाहिए। काॅमनवेल्थ के मामले में एक मजे की बात जब भ्रश्टाचार को लेकर भाजपा ने षोर गुल किया तो एक भाजपाई दलाल को मीडिया के सामने खडा कर दिया । और बडे षान से कहा कि भ्रश्ट कौन। जबकि होना तो ये चाहिए था कि बगैर राजनैतिक द्वैष के सभी घौटालेबाजों को सामने लाने का साहस सरकार को करना चाहिए था। सरकार को ये कभी नहीं समझना चाहिए कि जनता के पास दिमाग जैसी चीज का अभाव हैै और अगर वह ऐसा समझती है तो बिहार जैसे परिणामों के तैयार रहे।
Labels:
राजनीती
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment